Income Tax Rules 2026: टैक्स से जुड़े कामकाज को आसान बनाने के लिए आयकर व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। नए आयकर अधिनियम, 2025 के तहत टीडीएस (TDS) की रिपोर्टिंग के लिए चार अलग-अलग फॉर्म की जगह अब एक नया फॉर्म 141 लाया गया है। इस बदलाव का मकसद करदाताओं को अलग-अलग फॉर्म भरने की परेशानी से राहत देना और टैक्स रिपोर्टिंग की प्रक्रिया को अधिक सरल बनाना है। यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 से लागू होने की जानकारी दी गई है।
इस बदलाव का असर मकान खरीदने वाले लोगों, किरायेदारों और ठेकेदारों या प्रोफेशनल्स को भुगतान करने वाले व्यक्तियों पर पड़ सकता है। हालांकि, नया फॉर्म आने का मतलब यह नहीं है कि टीडीएस की दरें और भुगतान से जुड़े सभी नियम भी बदल गए हैं।
चार पुराने फॉर्म की जगह लेगा फॉर्म 141
अब तक अलग-अलग प्रकार के लेनदेन के लिए अलग टीडीएस फॉर्म भरने पड़ते थे। नई व्यवस्था में इनकी रिपोर्टिंग को एक ही फॉर्म के अंतर्गत लाया गया है। इसमें संबंधित लेनदेन के हिसाब से अलग-अलग शेड्यूल दिए गए हैं।
- फॉर्म 26QB: अचल संपत्ति की खरीद पर टीडीएस की रिपोर्टिंग।
- फॉर्म 26QC: निर्धारित परिस्थितियों में किराये के भुगतान पर टीडीएस।
- फॉर्म 26QD: व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) द्वारा ठेकेदारों और पेशेवरों को किए जाने वाले पात्र भुगतानों पर टीडीएस।
- फॉर्म 26QE: वर्चुअल डिजिटल एसेट, जैसे क्रिप्टोकरेंसी के हस्तांतरण से जुड़े टीडीएस की रिपोर्टिंग।
अब इन श्रेणियों के लिए फॉर्म 141 में संबंधित शेड्यूल का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे करदाताओं को अपनी जरूरत के अनुसार एक ही फॉर्म में सही विकल्प चुनकर जानकारी जमा करने की सुविधा मिलेगी।
मकान खरीदने वालों के लिए क्या बदलेगा?
प्रॉपर्टी खरीदने के दौरान टीडीएस से जुड़े नियमों का पालन करना खरीदार के लिए जरूरी होता है। सामान्य नियमों के तहत निवासी विक्रेता से 50 लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य की अचल संपत्ति खरीदने पर निर्धारित शर्तों के अनुसार 1 प्रतिशत टीडीएस काटना होता है।
नई व्यवस्था में ऐसे पात्र लेनदेन की जानकारी फॉर्म 141 के शेड्यूल बी के जरिए दी जा सकेगी। इससे खरीदारों के लिए टीडीएस की रिपोर्टिंग करना पहले के मुकाबले अधिक सुविधाजनक हो सकता है।
हालांकि, खरीदारों को ध्यान रखना होगा कि फॉर्म बदलने से टीडीएस काटने की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। लागू नियमों के अनुसार टीडीएस काटना और समय पर जमा करना जरूरी रहेगा।
किरायेदारों और मकान मालिकों के लिए भी अहम बदलाव
कुछ परिस्थितियों में किराये का भुगतान करने वाले व्यक्ति को मकान मालिक को भुगतान करते समय टीडीएस काटना पड़ सकता है। नए फॉर्म 141 में ऐसे भुगतानों की रिपोर्टिंग के लिए शेड्यूल ए का प्रावधान बताया गया है।
वहीं, ठेकेदारों और पेशेवर सेवाएं देने वाले लोगों को भुगतान करने वाले व्यक्तियों के लिए शेड्यूल सी उपयोगी होगा। इससे संबंधित लेनदेन की जानकारी एक ही फॉर्म के जरिए दर्ज की जा सकेगी।
इस व्यवस्था का फायदा उन लोगों को मिल सकता है, जिन्हें अलग-अलग तरह के भुगतान के लिए टीडीएस से जुड़े अनुपालन पूरे करने होते हैं।
गैर-निवासी विक्रेता से प्रॉपर्टी खरीदने पर क्या होगा?
गैर-निवासी व्यक्ति से संपत्ति खरीदने के मामलों में टीडीएस के नियम अलग हो सकते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 1 अक्टूबर 2026 से कुछ पात्र मामलों में फॉर्म 141 के शेड्यूल ई के जरिए संबंधित टीडीएस की रिपोर्टिंग की व्यवस्था भी जोड़ी गई है।
ऐसे लेनदेन में खरीदार को विक्रेता की आवासीय स्थिति और लागू कर नियमों की विशेष रूप से जांच करनी चाहिए, क्योंकि गैर-निवासी विक्रेता के मामलों में सामान्य निवासी विक्रेता वाले नियम सीधे लागू नहीं होते।
कहां और कैसे जमा होगा फॉर्म 141?
करदाता आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर उपलब्ध संबंधित सुविधा के माध्यम से फॉर्म भर सकते हैं। फॉर्म जमा करने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए।
- लेनदेन की सही श्रेणी और संबंधित शेड्यूल का चयन करें।
- भुगतान करने वाले और प्राप्त करने वाले व्यक्ति के पैन की जानकारी जांचें।
- लागू टीडीएस दर और भुगतान की राशि की पुष्टि करें।
- फॉर्म जमा करने और टीडीएस भुगतान से जुड़ी समय-सीमा का पालन करें।
पुराने लेनदेन के लिए कौन-सा फॉर्म भरना होगा?
नई व्यवस्था लागू होने से पहले हुए लेनदेन के लिए संबंधित तारीख और उस समय लागू आयकर कानून के प्रावधानों को ध्यान में रखना जरूरी है। इसलिए करदाताओं को केवल नए फॉर्म के नाम के आधार पर पुराने लेनदेन की रिपोर्टिंग नहीं करनी चाहिए।
कुल मिलाकर, फॉर्म 141 का उद्देश्य टीडीएस रिपोर्टिंग को एकीकृत और सुविधाजनक बनाना है। मकान खरीदने वालों, किरायेदारों और पेशेवर सेवाओं के लिए भुगतान करने वाले लोगों को इससे फॉर्म चुनने की प्रक्रिया में आसानी हो सकती है। हालांकि, सही अनुपालन के लिए लेनदेन की तारीख, लागू टीडीएस नियम और संबंधित शेड्यूल की पुष्टि करना जरूरी है।