तमिलनाडु की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई के एक बयान को लेकर चर्चा तेज हो गई है। भाजपा छोड़ चुके अन्नामलाई ने अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को लेकर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह कभी भी इस संगठन के समर्थन में नहीं रहे। उनके इस बयान को हाल ही में CJP के समर्थन में दिए गए उनके पुराने बयान से जोड़कर देखा जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुरुवार को अन्नामलाई ने कहा, “हमने कभी भी कॉकरोच जनता पार्टी का समर्थन नहीं किया है। उनका एजेंडा अलग है और हमारा एजेंडा अलग है।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में उनके रुख को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
पहले CJP के समर्थन में क्या बोले थे अन्नामलाई?
इससे पहले अन्नामलाई ने CJP के विरोध प्रदर्शन और उसके उठाए गए सवालों को लेकर अपनी राय रखी थी। उन्होंने कहा था कि वह संगठन के तौर-तरीकों या विरोध प्रदर्शन के तरीके से सहमत नहीं हो सकते, लेकिन जिन मुद्दों पर संगठन सवाल उठा रहा है, उन सवालों का समर्थन करते हैं।
उन्होंने यह भी कहा था कि CJP के नेताओं को गिरफ्तार कर जेल भेजने से वे और मजबूत हो सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर सवाल उठाने के अधिकार का भी समर्थन किया था।
भाजपा छोड़ने के बाद केंद्र सरकार पर भी उठाए सवाल
के. अन्नामलाई ने केंद्र सरकार की कार्यशैली को लेकर भी टिप्पणी की थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था कि केंद्र सरकार को सत्ता में अपने लंबे कार्यकाल को ध्यान में रखना चाहिए और हर समय किसी विरोधी को दुश्मन के रूप में पेश करने की प्रवृत्ति से बचना चाहिए।
उन्होंने CJP के प्रदर्शनों को देशविरोधी या विदेशी फंडिंग से संचालित बताने वाले आरोपों पर भी सवाल उठाए। अन्नामलाई का कहना था कि हर विरोध प्रदर्शन या असहमति को विदेशी ताकतों से जोड़ना उचित नहीं है।
SIR और विरोध प्रदर्शनों पर क्या है विवाद?
अन्नामलाई ने SIR और विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मुद्दों पर कानून की उचित प्रक्रिया के पालन की जरूरत पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि लोकतंत्र में कानूनी प्रक्रिया के उल्लंघन पर सवाल उठाने वालों को भी आलोचना और आरोपों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने यह भी दावा किया था कि नीट प्रश्नपत्र लीक से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने की अपील करने के बाद से उन्हें लगातार निशाना बनाया जा रहा है।
अन्नामलाई ने अपने बयान में यह भी याद दिलाया था कि वह 5 जून 2026 को भाजपा छोड़ चुके हैं। उन्होंने उन लोगों को जवाब दिया था, जो उनकी टिप्पणियों को पार्टी की मौजूदा राजनीतिक स्थिति से जोड़कर देख रहे थे।
विदेशी फंडिंग के आरोपों पर भी दी प्रतिक्रिया
CJP को लेकर विदेशी फंडिंग और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के आरोपों पर अन्नामलाई ने कहा था कि विदेशी अंशदान नियमन अधिनियम (FCRA) गृह मंत्रालय के अधीन आता है और संबंधित मामलों की जांच के लिए सरकारी एजेंसियां मौजूद हैं।
उन्होंने हर विरोध प्रदर्शन को देशविरोधी या विदेशी ताकतों से वित्तपोषित बताने की प्रवृत्ति की आलोचना की थी। उनके मुताबिक, ऐसे आरोपों के बजाय संबंधित मामलों पर तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए।
भाजपा ने भी अन्नामलाई के बयान पर उठाए सवाल
अन्नामलाई की टिप्पणियों पर तमिलनाडु भाजपा के प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने भी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने दावा किया कि भाजपा में रहते हुए अन्नामलाई SIR का समर्थन करते थे और एक चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद शशि थरूर के साथ बहस में भी उन्होंने इसका बचाव किया था।
भाजपा की ओर से उनके पुराने और नए बयानों के बीच अंतर को रेखांकित किया गया। वहीं, CJP को लेकर अन्नामलाई के हालिया बयान ने इस राजनीतिक विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है।
फिलहाल, CJP पर अन्नामलाई के दोनों बयानों के बीच अंतर को लेकर बहस जारी है। उनका ताजा बयान संगठन के एजेंडे से दूरी दर्शाता है, जबकि उनके पुराने बयान में संगठन द्वारा उठाए गए कुछ सवालों और कानूनी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों का समर्थन किया गया था।</