दिव्य दरबार
सोशल मीडिया पर बाबा का प्रचार, दुखों के निवारण की उम्मीद में हजारों किलोमीटर का सफर! रायपुर के दिव्य दरबार में आस्था, अंधविश्वास और सवालों का संगम*
महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान से पहुंचे श्रद्धालु; किसी ने पहली बार देखा बाबा का दरबार, तो किसी को पर्ची खुलने से जिंदगी बदलने की उम्मीद। आधुनिक युग में भी सवाल कायम—समस्याओं का समाधान आस्था में या वैज्ञानिक सोच में?
रायपुर, छत्तीसगढ़/पीयूष मिश्रा 9229629214
आधुनिकता और विज्ञान के दौर में भी चमत्कारों से समस्याएं दूर होने की उम्मीद लोगों को धार्मिक दरबारों तक खींच ला रही है। रायपुर के गुढ़ियारी स्थित अवधपुरी मैदान में 24 से 28 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले मां मातंगी दिव्य धाम के पांच दिवसीय दरबार में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। कुछ लोग कार्यक्रम शुरू होने से एक दिन पहले ही देर रात आयोजन स्थल पर पहुंच गए।
जब श्रद्धालुओं से डॉ प्रेमासाई महाराज बाबा के बारे में पूछा गया, तो कुछ ने बताया कि वे पहली बार यहां आए हैं और सोशल मीडिया के जरिए बाबा को जानते हैं। उन्हें उम्मीद है कि पर्ची खुलने से उनकी परेशानियों का समाधान हो जाएगा।
यहां सवाल आस्था का नहीं, बल्कि उन दावों की प्रमाणिकता का है, जिनसे लोगों को बीमारी, आर्थिक संकट और दूसरी समस्याओं से मुक्ति की उम्मीद बंधती है। आखिर क्या पर्ची से दुख दूर होंगे, या समस्याओं के समाधान के लिए ठोस मदद और वैज्ञानिक सोच जरूरी है?
रायपुर के इस पांच दिवसीय दरबार में आने वाले श्रद्धालुओं की उम्मीदें बड़ी हैं। कोई पहली बार पहुंचा है, तो कोई सोशल मीडिया पर मिली जानकारी से प्रभावित होकर यहां आया है। अब देखना यह होगा कि आयोजन के दौरान लोगों को किस तरह का मार्गदर्शन मिलता है और उनकी समस्याओं के समाधान को लेकर क्या दावे किए जाते हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या लोगों को उनकी समस्याओं से निपटने के लिए व्यावहारिक रास्ता मिलेगा, या वे उम्मीदों के सहारे वापस लौटेंगे?