प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति लगातार मजबूत हो रही है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के पूर्वानुमान के मुताबिक, अक्टूबर से दिसंबर 2026 के दौरान मध्य भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के नीनो 3.4 क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से औसतन 3.7 डिग्री सेल्सियस अधिक रह सकता है। इसका असर दुनिया के कई हिस्सों के तापमान और बारिश पर पड़ने की आशंका है। भारत में भी आने वाले महीनों के मौसम पर नजर रखी जा रही है।
प्रशांत महासागर में बढ़ रही गर्मी
अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु प्रक्रिया है। इसमें मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर की सतह का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। इससे समुद्र और वायुमंडल के बीच होने वाली गतिविधियों में बदलाव आता है, जो दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बारिश और तापमान को प्रभावित कर सकता है।
WMO के मुताबिक, नीनो 3.4 क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से औसतन 1.6 डिग्री सेल्सियस अधिक था। अगस्त 2026 तक यह अंतर बढ़कर 2.5 डिग्री सेल्सियस हो गया। संगठन के पूर्वानुमान में अक्टूबर-दिसंबर के दौरान यह अंतर करीब 3.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। यह नवंबर 2015 से जनवरी 2016 के दौरान दर्ज 2.6 डिग्री सेल्सियस के पिछले रिकॉर्ड से अधिक होगा।
अमेरिकी राष्ट्रीय महासागरीय एवं वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) ने 8 अक्टूबर 2026 को जारी अपने आकलन में कहा कि अल नीनो के जनवरी-मार्च 2027 तक मजबूत या बहुत मजबूत बने रहने की संभावना है। हालांकि, इसके संभावित प्रभाव हर क्षेत्र में एक जैसे नहीं होंगे।
भारत में बारिश और तापमान पर क्या असर होगा?
अल नीनो के मजबूत होने से भारत में बारिश के पैटर्न पर असर पड़ने की आशंका है। दी गई जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2026 में देश का दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से करीब 13% कम बारिश के साथ समाप्त हुआ।
WMO के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले महीनों में दक्षिण एशिया के अधिकांश हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है। अक्टूबर से दिसंबर के दौरान मध्य और दक्षिणी प्रायद्वीपीय दक्षिण एशिया में सामान्य से कम बारिश होने का जोखिम भी जताया गया है।
हालांकि, भारत में मौसम का निर्धारण केवल अल नीनो से नहीं होता। स्थानीय परिस्थितियों और दूसरे जलवायु कारकों की भी भूमिका रहती है। इसलिए अल नीनो के आधार पर देश के हर हिस्से में बारिश या तापमान को लेकर एक जैसा निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
2027 की शुरुआत तक रह सकता है असर
NOAA के अक्टूबर पूर्वानुमान के मुताबिक, अल नीनो के जनवरी-मार्च 2027 तक मजबूत या बहुत मजबूत बने रहने की संभावना है। ऐसे में आने वाले महीनों में समुद्र की सतह के तापमान और वायुमंडलीय परिस्थितियों पर नजर रखी जाएगी।
वैज्ञानिक इन परिस्थितियों के आधार पर वैश्विक और क्षेत्रीय मौसम का आकलन कर रहे हैं। भारत में बारिश और तापमान पर इसका वास्तविक असर स्थानीय मौसम की परिस्थितियों और दूसरे जलवायु कारकों पर भी निर्भर करेगा।