पीयूष मिश्रा / 9229629214
अन्नदाताओं से उनका हक छीनना बंद करे सरकार
रायपुर/06 नवंबर 2026। धान खरीदी प्रक्रिया के नाम पर भाजपा सरकार द्वारा लागू किए गए नए, बायोमेट्रिक सत्यापन और टोकन को लेकर जटिल और दमनकारी नियमों पर आपत्ति दर्ज करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि सरकार ने प्रदेश के अन्नदाताओं को बुरी तरह संकट में डाल दिया है। ओटीपी के स्थान पर बायोमेट्रिक सत्यापन की बाध्यता, रकबे के आधार पर टोकन की संख्या सीमित करना, टोकन निरस्त होने का डर, और खरीदी की अवधि में कटौती, यह सब इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि यह सरकार किसानों को धान बेचने से रोकने और उनका उत्पीड़न करने के लिए सुनियोजित षड्यंत्र रच रही है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि एक तो मौसम की मार, ऊपर से टोकन की कैंची और 15 दिन बाद खरीदी शुरू करके 15 दिन पहले खरीदी बंद करने का फरमान, यह किसानों के साथ सीधी धोखाधड़ी है। भाजपा सरकार ढिंढोरा पीट रही है कि खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी और डिजिटल बनाया जा रहा है, जबकि धरातल यह है कि सर्वर डाउन रहने, नेटवर्क की समस्या और बायोमेट्रिक मशीनें फेल होने से किसान घंटों कतारों में खड़े रहने को मजबूर होंगे। फिंगरप्रिंट मैच न होने पर किसानों को लौटाया जायेगा। पिछली कांग्रेस सरकार ने किसानों के लिए टोकन प्रक्रिया को बेहद सरल, सुगम और विकेंद्रीकृत बनाया था। इसके विपरीत, इस सरकार ने रकबे के आधार पर टोकन की संख्या 2 एकड़ से कम पर सिर्फ 1 टोकन की लिमिट लगाकर किसानों के हाथ-पैर बांध दिए हैं। मौसम की खराबी और खेतों में नमी के बीच 15 दिन पहले खरीदी बंद करने का निर्णय किसानों को औने-पौने दामों पर बिचौलियों को धान बेचने पर मजबूर करने की साजिश है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि छोटे और सीमांत किसानों पर एकमुश्त पूरा धान काटने, ढोने और बेचने का भारी आर्थिक और मानसिक दबाव आएगा। पारदर्शिता के नाम पर आप अन्नदाता को अपराधी मानकर फिंगरप्रिंट और टोकन की कैंची से उनका हक क्यों काट रहे हैं? क्या बिचौलियों को फायदा पहुंचाने के लिए यह जटिल जाल बुना गया है? 2 एकड़ से कम जमीन वाले छोटे किसानों को सिर्फ 1 ही टोकन देने का क्या औचित्य है? क्या छोटा किसान एक बार में अपना सारा धान काटकर एक ही दिन में केंद्र तक ला सकता है? बायोमेट्रिक सत्यापन फेल होने या सर्वर डाउन होने की स्थिति में यदि किसी किसान का टोकन निरस्त होता है, तो उसकी भरपाई कौन करेगा? क्या सरकार किसानों को अपराधी मानकर चल रही है? तुंहर टोकन ऐप कि तकनीकी समस्या और ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट व सर्वर की व्यवस्था क्यों नहीं सुधारी गई?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि सरकार का मकसद किसानों को सहूलियत देना नहीं, बल्कि किसी तरह धान खरीदी का आंकड़ा घटाना और सरकारी खजाना बचाना है। छत्तीसगढ़ धान का कटोरा है और किसान यहां की रीढ़ हैं। खेतों में नमी और मौसम की मार के बावजूद समय सीमा एक महीने घटा देना सीधे तौर पर छत्तीसगढ़ के किसानों के पेट पर लात मारना है। यह छत्तीसगढ़िया किसानों के साथ अन्याय है। नियमों की आड़ में धान खरीदी के आंकड़े को कम करना बंद करे सरकार।
