दीपावली (8 नवंबर 2026) पर लक्ष्मी-गणेश पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 05:54 बजे से रात 07:50 बजे तक (कुल अवधि 1 घंटा 56 मिनट) रहेगा। इस दौरान प्रदोष काल और वृषभ स्थिर लग्न का श्रेष्ठ संयोग बन रहा है।
विभिन्न वर्गों और समय के अनुसार शुभ मुहूर्त:
- गृहस्थ परिवारों के लिए (प्रदोष काल व वृषभ लग्न): शाम 05:54 से रात 07:50 बजे तक
- व्यापारी और दुकान/ऑफिस के लिए: दोपहर 01:14 से दोपहर 02:42 बजे तक (कुंभ स्थिर लग्न) या प्रदोष काल में
- निशीथ काल (तांत्रिक साधना व मंत्र जाप के लिए): रात 11:39 बजे से रात 12:31 बजे तक
- सिंह लग्न (निशीथ काल के बाद): रात 12:24 से सुबह 02:42 बजे तक (9 नवंबर)
- पोशाक)
पूजा के बर्तन और आसन
- लकड़ी की चौकी (पूजा का आसन)
- कलश (तांबे या मिट्टी का)
- थाली (आरती और सामग्री रखने के लिए)
- दीपक (कम से कम एक बड़ा मिट्टी का/पीतल का दीया और अन्य छोटे दीये)
पवित्र जल और पंचामृत
- गंगाजल
- दूध, दही, शहद, घी, और चीनी (पंचामृत बनाने के लिए)
रोली, अक्षत और सुगंध
- रोली (कुमकुम)
- अक्षत (साबुत बिना टूटे हुए चावल)
- चंदन
- सिंदूर
- अत्तर (सुगंधित तेल)
- कलावा (मौली/रक्षासूत्र)
नैवेद्य, फल और भोग
- खील और बताशे (दीपावली का मुख्य प्रसाद)
- पंच मेवा (काजू, बादाम, किशमिश, मखाना, छुआरा)
- ताजे फल (विशेषकर सेब, केला, अनार और सिंघाड़ा)
- मिठाई (लड्डू या पेड़ा)
- नारियल (पानी वाला, कलश पर रखने के लिए)
- पान के पत्ते और सुपारी
- लौंग और इलायची
फूल और माला
- कमल का फूल (लक्ष्मी जी का प्रिय फूल)
- गेंदे या गुलाब के फूल और माला
- आम या अशोक के पत्ते (तोरण और कलश के लिए)
धूप और दीप सामग्री
- धूपबत्ती और अगरबत्ती
- रूई की बत्तियां
- शुद्ध देसी घी या तिल का तेल (दीपक के लिए)
- कपूर (आरती के लिए)
- माचिस
अन्य शुभ सामग्रियां
- कमलगट्टा, कौड़ियां और गोमती चक्र (धन समृद्धि के लिए)
- दूर्वा घास (गणेश जी के लिए)
- जनेऊ (गणेश जी के लिए)
- सिक्के (सोने, चांदी या तांबे के)
- बही-खाता या कलम (व्यापारियों के लिए)
- ओम अपवित्रः पवित्रो वा… या केवल भगवान विष्णु का नाम (नारायण-नारायण) लें।
- चौकी स्थापना और संकल्प
- चौकी सजाएं: लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।
- अक्षत की ढेरी: चौकी के बीच में थोड़ा सा चावल (अक्षत) रखें।
- मूर्ति स्थापना: उस चावल पर लक्ष्मी जी को और उनके दाहिनी ओर (आपके बाईं ओर) गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें।
- कलश स्थापना: चौकी पर लक्ष्मी जी के पास चावल की एक और छोटी ढेरी बनाकर उस पर पानी से भरा कलश रखें। कलश के मुख पर मौली बांधें, आम के ५ पत्ते रखें और ऊपर से नारियल रखें।
- संकल्प: हाथ में थोड़ा जल, अक्षत और फूल लेकर मन में संकल्प करें कि “मैं आज दीपावली पर सुख-समृद्धि के लिए लक्ष्मी-गणेश जी का पूजन कर रहा/रही हूँ।”
- सर्वप्रथम गणेश पूजन
- आह्वान: हाथ जोड़कर गणेश जी का ध्यान करें।
- स्नान व तिलक: गणेश जी की मूर्ति पर जल छिड़कें (स्नान कराएं), रोली से तिलक करें और अक्षत लगाएं।
- सामग्री अर्पण: दूर्वा घास, जनेऊ, फूल, और मोदक या लड्डू का भोग लगाएं।
- धूप-दीप: धूप और एक छोटा दीपक गणेश जी के सामने जलाएं।
- महालक्ष्मी पूजन
- ध्यान और आवाहन: हाथ में फूल लेकर माता लक्ष्मी का ध्यान करें और उन्हें आसन ग्रहण करने की प्रार्थना करें। फूल मां के चरणों में अर्पित कर दें।
- स्नान: मां की मूर्ति पर सांकेतिक रूप से जल, फिर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, चीनी का मिश्रण) और दोबारा जल छिड़कें।
- श्रृंगार और तिलक: माता को वस्त्र (कलावा) चढ़ाएं। रोली, सिंदूर और चंदन से तिलक करें। अक्षत (चावल) लगाएं।
- विशेष वस्तुएं: माता लक्ष्मी को कमलगट्टा, कौड़ियां, गोमती चक्र और सोने/चांदी के सिक्के अर्पित करें।
- पुष्प अर्पण: लाल गुलाब या कमल का फूल मां को बहुत प्रिय है, उसे अर्पित करें।
- कुबेर, बही-खाता और तिजोरी पूजन
- कुबेर पूजन: अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान पर तिलक करें।
- कलम और बही-खाता: यदि व्यापारी हैं, तो अपनी डायरी, लैपटॉप या कलम पर रोली से स्वास्तिक बनाकर उनकी पूजा करें।
- भोग और नैवेद्य
- प्रसाद: माता लक्ष्मी और गणेश जी को खील-बताशे, पंचमेवा, फल और मिठाइयों का भोग लगाएं।
- जल: भोग लगाने के बाद आचमन (सांकेतिक रूप से पीने के लिए जल) अर्पित करें।
- आरती और क्षमा याचना
- मुख्य दीपक: घी का बड़ा दीपक जलाएं।
- आरती: परिवार के सभी सदस्य खड़े होकर पहले गणेश जी की आरती (जय गणेश जय गणेश देवा) और फिर लक्ष्मी जी की आरती (ओम जय लक्ष्मी माता) करें।
- परिक्रमा: आरती के बाद अपनी ही जगह पर एक बार गोल घूमकर (परिक्रमा) प्रणाम करें।
- क्षमा याचना: हाथ जोड़कर भगवान से प्रार्थना करें: “हे प्रभु, हे माता लक्ष्मी, पूजा में जो भी भूल-चूक या कमी रह गई हो, उसे क्षमा करें और हमारे घर में स्थाई रूप से वास करें।”
