पीयूष मिश्रा / 9229629214
RTI से हुआ था खुलासा: कुशालपुर ड्रेनेज कार्य अधूरा रहा, फिर भी ठेकेदार पर पेनाल्टी शून्य
सांसद, विधायक और महापौर बताएं—बिना नाली और बिना चौड़ीकरण के बिछाया गया डामर पहली ही बारिश में बहेगा या नहीं?
दस्तावेजों के साथ उच्चस्तरीय जांच और जन-आंदोलन की चेतावनी
रायपुर:
वामनराव लाखे वार्ड (क्र. 66) के अंतर्गत कुशालपुर–प्रोफेसर कॉलोनी मार्ग पर ₹296.85 लाख (लगभग 3 करोड़ रुपए) की लागत से कराए जा रहे डामरीकरण के भूमिपूजन पर अधिवक्ता एवं छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के पूर्व सदस्य मनोज सिंह ठाकुर ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने हाल ही में स्मार्ट सिटी मिशन को लेकर केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) से सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिले आधिकारिक खुलासों के हवाले से जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की मिलीभगत पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
मनोज सिंह ठाकुर ने भूमिपूजन में शामिल सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक सुनील सोनी और महापौर मीनल चौबे से सीधा सवाल किया कि करोड़ों के ड्रेनेज घोटाले पर चुप्पी साधकर केवल डामर की लीपापोती किसके दबाव में की जा रही है?
RTI से उजागर हुआ था ड्रेनेज घोटाला:
अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने आधिकारिक दस्तावेज़ों का हवाला देते हुए बताया कि स्मार्ट सिटी मिशन के तहत वर्ष 2021-22 में निष्पादित कुशालपुर-संतोषी नगर-सुंदर नगर ड्रेनेज प्रोजेक्ट का अनुबंध समय-सीमा बीतने के बाद भी अधूरा रहा। इसके बावजूद स्मार्ट सिटी प्रशासन ने ठेकेदारों पर ‘शून्य’ (Nil) पेनाल्टी लगाई और बिना थर्ड-पार्टी क्वालिटी ऑडिट व भौतिक सत्यापन के कागजों पर 100% फंड व्यय दिखा दिया। नतीजा यह है कि आज भी सामान्य बारिश में कुशालपुर, संतोषी नगर और प्रोफेसर कॉलोनी में नाली का गंदा पानी घरों और सड़कों पर भर जाता है।
सड़क चौड़ीकरण और अतिक्रमण हटाने से परहेज क्यों?
उन्होंने कहा कि गोपिया पारा से माँ दंतेश्वरी मंदिर, संतोषी चौक, तिरंगा चौक होते हुए रिंग रोड तक का मार्ग अत्यंत संकरा हो चुका है। दिन-रात भीषण जाम से स्कूली बच्चे, एंबुलेंस और आम नागरिक त्रस्त हैं। बिना अतिक्रमण हटाए और सड़क को चौड़ा किए सिर्फ डामर पोत देना न तो जाम खत्म करेगा और न ही जलभराव रोकेगा। पहली ही बारिश में यह ₹2.96 करोड़ जनता के टैक्स का पैसा नाले में बह जाएगा।
प्रमुख मांगें:
ड्रेनेज का ऑडिट एवं EOW जांच: कुशालपुर-संतोषी नगर स्मार्ट सिटी ड्रेनेज में कागजी भुगतान और शून्य पेनाल्टी की निष्पक्ष जांच हो।
पहले चौड़ीकरण, फिर डामरीकरण: अतिक्रमण हटाकर सड़क को मास्टर प्लान के अनुसार चौड़ा किया जाए और भूमिगत जलनिकासी सुनिश्चित करने के बाद ही डामर बिछाया जाए।
जनता के पैसे की बर्बादी पर रोक: जलभराव की स्थिति ठीक किए बिना डामर बिछाने वाले ज़िम्मेदार अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय हो।
मनोज सिंह ठाकुर ने चेतावनी दी कि यदि कागजी लीपापोती को रोककर बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे क्षेत्रवासियों के साथ मिलकर उग्र आंदोलन करेंगे और इस विषय को विधिक मंच तक ले जाएंगे।
