रायपुर। छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज में अनियमितता मिलने पर स्वास्थ्य विभाग ने 11 निजी अस्पतालों को योजना से बाहर कर दिया है। इनमें रायपुर के सात अस्पताल शामिल हैं। इनका पंजीयन एक से तीन साल तक के लिए निरस्त किया गया है। अब इन अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत मरीजों का इलाज नहीं हो सकेगा। विभाग संबंधित अस्पतालों पर जुर्माना लगाने की तैयारी भी कर रहा है।
शिकायतों के बाद आठ जिलों में औचक जांच
योजना के तहत इलाज में गड़बड़ी की शिकायतों पर स्वास्थ्य विभाग ने राज्य स्तरीय जांच दल गठित किया था। टीम ने 30 सितंबर को रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, बस्तर, सरगुजा, कवर्धा, कोंडागांव और कोरबा के अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान मरीजों को दिए जा रहे इलाज, अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं और उपचार से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई।
जांच के बाद संबंधित अस्पतालों से तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया था। अस्पतालों के जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर पंजीयन निरस्त करने की कार्रवाई की गई।
इन अस्पतालों पर हुई कार्रवाई
रायपुर के एसके केयर अस्पताल, श्री अनंत साई अस्पताल, श्री महावीर अस्पताल, वरदान अस्पताल, श्री रावतपुरा सरकार अस्पताल, श्रीनिवास अस्पताल और सुयश इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस का पंजीयन निरस्त किया गया है। इनमें कुछ अस्पतालों पर एक साल, जबकि कुछ पर तीन साल की कार्रवाई हुई है।
इसके अलावा बिलासपुर के अशोक प्रसूति मंदिर, कवर्धा के जय जगन्नाथ अस्पताल, भिलाई के पल्स अस्पताल और जगदलपुर के स्वामी चंद्रशेखरानंद अस्पताल पर भी कार्रवाई की गई है।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि योजना में पारदर्शिता बनाए रखने और मरीजों को बेहतर उपचार सुनिश्चित करने के लिए जांच और कार्रवाई जारी रहेगी।
