पीयूष मिश्रा / 9229629214
जशपुर –
न किराए की वसूली, न आवास खाली कराने की कार्रवाई पर स्पष्टता
सरकारी आवास पर सालों से कब्जा, शासन-प्रशासन मौन!
सरकारी आवास आम नागरिकों की सुविधा और शासकीय व्यवस्था के लिए बनाए जाते हैं, लेकिन जब सरकारी आवास पर सालों तक किसी सेवानिवृत्त व्यक्ति का कब्जा बना रहे, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है।
छत्तीसगढ़ में सरकारी आवंटित आवास पर एक सेवानिवृत्त व्यक्ति के लंबे समय से कथित कब्जे का मामला सामने आया है। आरोप है कि न तो आवास खाली कराया जा रहा है और न ही किराए की वसूली को लेकर कोई ठोस कार्रवाई दिखाई दे रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर शासन-प्रशासन इस मामले में कब जागेगा?
सरकारी आवास पर कब्जे का आरोप
सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और उसका नियमानुसार उपयोग सुनिश्चित करना शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है। लेकिन यहां सरकारी आवंटित आवास पर एक सेवानिवृत्त व्यक्ति के वर्षों से कब्जे में रहने का आरोप लगाया जा रहा है।
आरोप है कि लंबे समय से आवास खाली नहीं किया गया है। यदि आवास का आवंटन समाप्त हो चुका है, तो नियमानुसार उसे खाली कराने और बकाया किराए की वसूली के लिए क्या कदम उठाए गए हैं? यह अब एक बड़ा सवाल बन गया है।
किराया वसूली और कार्रवाई पर सवाल
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सरकारी आवास पर नियमानुसार रहने की अनुमति नहीं है, तो अब तक उसे खाली कराने की कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या संबंधित विभाग ने आवास का रिकॉर्ड खंगाला है? क्या बकाया किराए का आकलन किया गया है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब-तलब किया गया है?
इन सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है, ताकि सरकारी संपत्ति के उपयोग में पारदर्शिता बनी रहे और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
शासन-प्रशासन से सवाल
सरकारी संपत्ति किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि जनता की संपत्ति है। ऐसे में यदि किसी सरकारी आवास पर अनधिकृत कब्जे की शिकायत है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
शासन-प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आवास का वर्तमान दर्जा क्या है, किराए की स्थिति क्या है और आवास खाली कराने के लिए नियमानुसार क्या कार्रवाई की जा रही है।
फिलहाल इस मामले में कई सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेता है और सरकारी आवास को लेकर नियमों के तहत क्या कदम उठाए जाते हैं।
सरकारी संपत्ति पर कथित अवैध कब्जे का मामला आखिर कब सुलझेगा? क्या प्रशासन कार्रवाई करेगा या यह मामला यूं ही फाइलों में दबा रहेगा?
